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देश में कोरोनावायरस के कारण महा मंदी का दौर चल रहा है। कोरोना महामारी में अगर कोई हमें बचा रहा है तो वो है डॉक्टर लेकीन बीजेपी सरकार ने उनकी तनख्वाह में कटौती कर दी है जिसके कारण कई डाक्टर और अन्य कर्मचारि खफा होकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा है कि वह कोरोना के खिलाफ लड़ रहे डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सैलरी समय पर दे। नहीं तो हमें कोई लिगल एक्सन लेना होगा यह कहकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई और कहा कि इतने भी निचे मत गिरये। सरकार को सोचना चाहिए कि जो दीन रात मेहनत करके हमारी जान की रक्षा कर रहा हैं उनके साथ सरकार ऐसा कैसे कर सकता है।

सुनवाई के दौरान केन्द्र ने कहा कि उसने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। केन्द्र ने बताया कि 4 राज्यों ने इन्हें अभी तक लागू नहीं किया है। जिनमें उत्तर प्रदेश बिहार मध्यप्रदेश गुजरात है। केन्द्र के इस स्टैंड पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि आप असहाय नहीं हैं। आप इसे देखें कि आपके आदेश का पालन हुआ है या नहीं।

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह ने कहा कि डीएम एक्ट के तहत आपको शक्तियां मिली हुई हैं। इसलिए आप इस दिशा में कदम भी उठा सकते हैं। बता दें कि कोरोना संकट के बीच में स्वास्थ्य कर्मियों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में याचिकाकर्ता ने शिकायत की थी कि स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर क्वारंटीन पीरियड को छुट्टी के तौर पर ट्रीट किया जा रहा है और कर्मचारियों की सैलरी काटी जा रही है!

सवाल ये है कि जो PM फंड में पैसा जमा हुआ है वो क्या बीधायको को खरीदने पर खर्च कर दिया गया है किया जो सरकार कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रही है।